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Saturday, February 4, 2012

Phul Gendwa Na Maaro

Movie: Dooj Ka Chand
Year: 1964
Music Director: Roshan
Lyrics: Sahir Ludhianvi
Singer: Manna Dey


हाँ... हाँ...
अरे हाँ...
हाँ... रे हाँ ...

फुल गेंदबा न मारो, न मारो
लगत करेजवा में चोट
फुल गेंदबा न मारो, न मारो
लगत करेजवा में चोट

दूँगी मैं दुहाई
कहे चतुर बनत छिछोरी करत हरजाई
फुल गेंदबा न मारो, न मारो
फुल गेंदबा न मारो, न मारो
लगत करेजवा में चोट

१.
हे... दहका हुआ ये अंगारा
अं... गा... रा...  हाँ...
दहका हुआ ये अंगारा
जो गेंदबा कहलाये है
तन पर जहान पड़े पापी
वहीं दाग पड़ जाए है
अंग अंग मोरा पीर करे
और कर के कहे
फुल गेंदबा न मारो, न मारो
फुल गेंदबा दबा दबा दबा दबा 
दबा दबा दबा दबा न मारो, न मारो
लगत करेजवा में चोट

२.
ए... फुल गेंदबा... हाँ.. न मारो
अजी फुल गेंदबा न मारो
फुल गेंदबा न मारो
फुल गेंदबा न मारो मैका न मारो, न मारो, न मारो 
फुल गेंदबा न मारो, न मारो 
लगत करे जतकरे जतकरे जतकरे जतकरे
जतकरे जतकरे जतकरे जतकरे
जतकरे जतकरे जतकरे जतकरे
जतकरेजवा में चोट

३.
रुक जाओ, रुक जाओ
रुक जाओ, रुक जाओ, रुक जाओ
न सताओ मोहे ज़ुल्मी बलम, ओ बलम
न सताओ मोहे ज़ुल्मी बलम, ओ बलम
मान जाओ बिनती अबला की
देखो देखो अब दूँगी दुहाई
काहे चतुर बनत छिछोरी करत हरजाई
फुल गेंदबा,  न,  मारो,  न,  मारो,  न
प प ध, ध ध ध ध ध ध ध नि ध, प म ग प म, ग म ग रे सा,
सां सा, सां सा
फुल गेंदबा न मारो,
न मारो, न मारो,
न मारो, न मारो   हा
न मारो, न मारो
लगत करेजवा में चोट, 
करेजवा में चोट, 
करे जवा में चोट,
सां सां   गं रें   रें सां,   सां मं   मं मं   गं रें   रें सां,
सां नि नि नि, सां ध ध ध, सां प प प,
सां प, सां प, सांप, सांप, नि मा...

आ.. आ.. आ.. आ...
फुल गेंदबा न मारो, न मारो, ओ.....
न मारो, लगत करेजवा में चोट
करेजवा में चोट
करेजवा में चो....ट... रे

Friday, February 3, 2012

Ponch Kar Ashq Apni Aankhon Se

Movie: Naya Raasta
Year: 1970
Music Director: N Dutta
Lyrics: Sahir Ludhianvi
Singer: Mohd. Rafi


पोंछ कर अश्क़ अपनी आँखों से
पोंछ कर अश्क़ अपनी आँखों से
मुस्कुराओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने
पोंछ कर अश्क़ अपनी आँखों से
मुस्कुराओ तो कोई बात बने

१.
ज़िन्दगी भीख में नहीं मिलती
ज़िन्दगी भीख में नहीं मिलती
ज़िन्दगी बढ़ के छीनी जाती है
ज़िन्दगी बढ़ के छीनी जाती है
अपना हक़ संगदिल ज़माने से
छीन पाओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने

२.
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब
जो भी हो आदमी से कमतर है
जो भी हो आदमी से कमतर है
इस हकीकत को तुम भी मेरी तरह
मान जाओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने

३.
नफरतों के जहान में हमको
नफरतों के जहान में हमको
प्यार की बस्तियां बसानी हैं
प्यार की बस्तियां बसानी हैं
दूर रहना कोई कमाल नहीं
पास आओ तो कोई बात बने
पोंछ कर अश्क़ अपनी आँखों से
मुस्कुराओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा
सर उठाओ तो कोई बात बने